
कविता शुक्ला एक नाम लेकिन मेरे लिए एक मुलाक़ात! जब भी बच्चों के स्कूल जाती हूँ और प्रतीक्षा का उतरा हुआ चेहरा देखती हूँ तो वो मुलाक़ात और याद आती है कुल एक घंटे का साथ था प्रतीक्षा की मम्मी के साथ हम दोनों साथ-साथ बैठे,अपने बच्चों की बातें करते.मेरे बेटे को बहुत शिकायतें थी हमने दोनों की बहुत सी बातें की.उनकी बड़ी बेटी मेरे बड़े बेटे की क्लास मैं थी,छोटे बेटे के साथ छोटी बेटी.उस दिन हमने एक दुसरे से बच्चों को भी मिलवाया लेकिन वो आखिरी बार का मिलना हो गया.उस दिन का चहकता उनका चेहरा अब भी याद है.कुछ दिनों बाद ही कविता नहीं रही,और उस दिन के बाद क्लास की बेस्ट गर्ल्स पीछे होने लगी,अब हमेशा मैं उनमे वो ख़ुशी ढूंढती हूँ पर कहाँ.......
