Sunday, February 21, 2010

एक मुलाक़ात


कविता शुक्ला एक नाम लेकिन मेरे लिए एक मुलाक़ात! जब भी बच्चों के स्कूल जाती हूँ और प्रतीक्षा का उतरा हुआ चेहरा देखती हूँ तो वो मुलाक़ात और याद आती है कुल एक घंटे का साथ था प्रतीक्षा की मम्मी के साथ हम दोनों साथ-साथ बैठे,अपने बच्चों की बातें करते.मेरे बेटे को बहुत शिकायतें थी हमने दोनों की बहुत सी बातें की.उनकी बड़ी बेटी मेरे बड़े बेटे की क्लास मैं थी,छोटे बेटे के साथ छोटी बेटी.उस दिन हमने एक दुसरे से बच्चों को भी मिलवाया लेकिन वो आखिरी बार का मिलना हो गया.उस दिन का चहकता उनका चेहरा अब भी याद है.कुछ दिनों बाद ही कविता नहीं रही,और उस दिन के बाद क्लास की बेस्ट गर्ल्स पीछे होने लगी,अब हमेशा मैं उनमे वो ख़ुशी ढूंढती हूँ पर कहाँ.......

Tuesday, February 9, 2010

basant

aaj ki bhigi-bhigi ye raat,aur mahka-mahka ye basant,
her taraf chhaya hai dilon main muhbbaton ka hi rang,
kahi shahnayi ki goonj hai,to kahi dilon main pyaar ka ehsaas,
her pal ko banate ja rahen hain hum dil main khaas,
lout ke aaye na aaye phir ye jamana,
kal tak jo saath the ab najar se hain door,
jee loon es pal ko kahi ye bhi na ho jayen najron se door.