Saturday, May 22, 2010

क्या पाया क्या खोया मैंने


क्या पाया क्या खोया मैंने ,कितना अश्क बहाया मैंने,
कभी यूँ लगता है सब मेरे अपने ही हैं।
कभी ये लगता है जैसे सबको ही ठुकराया मैंने,
दिया जो तुमने मुझको कम तो नहीं है,
फिर भी क्यों खुद को यूँ ही भटकाया मैंने,
सफ़र ये मेरा कट ही जायेगा इक दिन,
तन्हा-तन्हा क्यूँ खुद को उलझाया मैंने
मेरे गम की बात को अब तो रहने ही दो
किस्मत में जितना था उतना पाया मैंने.

Tuesday, May 11, 2010

ये रात


हर रात की एक अपनी कहानी होती है,
दिन भर मिले एहसासों की दिल पे निशानी होती है,
जो मिली हंसी तो हंस लिए हम भी,
जो दर्द पाए तो छुपा के रख लिया उसको,
किसी से बाँटना नहीं मुझे दिल की बातें,
अब हर एक बात मैं दिल में ही रख लेती हूँ,
जो कहना हो कुछ तो खुद से ही कह लेती हीं
इस बहाने से निकल जाता है दिल का गुबार;
मिल ही जाता है मेरे दिल को भी करार
.

Monday, May 10, 2010

एक दिन


एक और दिन गुजर गया यूँ चलते-चलते,
मौसम ने भी साथ दिया मेरा रंग बदलके,
कहीं चहकी कोई चिड़िया,कही कोई कोयल बोली,
सबने मिल के मस्ती की चादर यूँ ओढ़ ली,
जैसे कल तक भी रहेगा ऐसा ही एहसास ,
गर्मी और उमस हो गई बीते कल की बात।
अब तो सूखे पौधों में भी हरियाली आ गई,
जिधर देखो उधर जिन्दगी मुस्करा रही,